8 साल पूर्व
|| श्री गणेश जी आरती ||
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी । माथे पे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥ माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया । बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥ माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
हार चढ़ै, फूल चढ़ै और चढ़ै मेवा । लड्डुअन को भोग लगे, संत करे सेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥ माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
दीनन की लाज राखो, शंभु सुतवारी । कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥ माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
पार्वती के पुत्र कहावो शंकर सुत स्वामी । गजानंद गणनायक भक्तन के स्वामी ॥
ऋद्धि सिद्धि के मालिक मूषक असवारी । कर जोड़ विनती करते आनंद ओर भारी ॥
प्रथम आपको पूजत शुभ मंगल दाता । सिद्ध होए सब कारज दरिद्र हट जाता ॥
सुंडसुंडला इंद इंदाला मस्तक पर चन्दा । कारज सिद्ध करावो काटो सब फन्दा ॥
गणपति जी की आरती जो कोई कर गावे । तब बैकुंठ परम पर निश्चित ही पावे ॥
|| Shri Ganeshji Arti ||
Jai ganesh, Jai ganesh, Jai ganesh deva ॥ Mata jaaki parvati, pitaa mahadeva ॥
Ek dant dayavant,char bhujadhari l Mathe pe sindur sohe,moos ki savari ll
Jai ganesh, Jai ganesh, Jai ganesh deva ॥ Mata jaaki parvati, pitaa mahadeva ॥
Andhan ko aankh det, korhin ko kaya l banjhan ko putr det,nirdhan ko maya ll
Jai ganesh, Jai ganesh, Jai ganesh deva ॥ Mata jaaki parvati, pitaa mahadeva ॥
har chade,ful chade aur chade meva l laduan ko bhog lage,sant kare seva ll
Jai ganesh, Jai ganesh, Jai ganesh deva ॥ Mata jaaki parvati, pitaa mahadeva ॥
dinan ki laj rakho,shambhu sutavari ll kamana ko purn karo,jag balihari l
Jai ganesh, Jai ganesh, Jai ganesh deva ॥ Mata jaaki parvati, pitaa mahadeva ॥
Paarvati ke putr kahaavo Shankar sut swami l Gajanand gannaayak bhaktan ke swami ll
Riddhi siddhi ke maalik mushak asawari l Kar jod vinti karte aanand ur bhaari ll
Pratham aapko poojat shubh mangal daata l Siddh hoye sab kaaraj daridra hat jaata ll
Sund sundla ind indaala mastak par chanda l Kaaraj siddh karavo kaato sab phandaa ll
Ganpati ji ki arti jo koi kar gaave l Tab baikunth param par nischit hi pave ll
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