ज्योतिषशास्त्र : वैदिक पाराशर

तुला लग्न के जातक का फलादेश

Sandeep Pulasttya

4 साल पूर्व

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जन्म कुण्डली का पहला खाना सम्पूर्ण कुण्डली का सर्वाधिक महत्वपूर्ण भाग होता है। ज्योतिष भाषा में इस खाने को प्रथम भाव अथवा लग्न भाव भी कहा जाता है। ज्योतिषाचार्य किसी भी जातक की जन्म कुण्डली में लग्न एवं लग्नाधिपति अर्थात लग्नेश की स्थिति को देख कर ही सम्बंधित जातक के रंग, रूप, शारीरिक गठन, आचरण, स्वभाव एवं स्वास्थ्य आदि के सम्बन्ध में विवेचना कर देते हैं। कुछ अनुभवी एवं ज्ञानी ज्योतिषाचार्य तो किसी भी जातक की आभा, मुखमण्डल, आदतें एवं व्यवहार को देखकर ही सम्बंधित जातक के जन्म लग्न का एकदम सटीक पता लगा लेते हैं।

किसी जातक की जन्म कुण्डली का फलादेश बहुत कुछ उस जातक की कुण्डली के लग्न भाव की  राशि, लग्नेश एवं उसकी स्थिति, लग्न भाव में स्थित ग्रह, लग्न भाव पर दृष्टि डालने वाले ग्रह, ग्रहों की युति तथा लग्न भाव की दृष्टि आदि से प्रभावित होता हैं। लोक प्रकृति, भौगोलिक एवं सामाजिक स्थितियाँ भी सम्बंधित जातक के कुण्डली फलादेश को प्रभावित करती हैं। यहां हम तुला लग्न में जन्मे जातक का फलादेश प्रस्तुत कर रहे हैं -

 

तुला लग्न :

तुला लग्न में जान लेने वाले जातकों की रूचि न्याय एवं अनुशासन के प्रति अधिक होता है। ऐसे जातक राजनीती में अधिक सफल होते हैं। ये परोपकार अपने हानि लाभ को पूरा ध्यान में रखकर ही करते हैं। गरीबों में भोजन बांटना, अतिथि सेवा सत्कार करना एवं पानी के पियाऊ व बाग बागीचे आदि लगवाना इनके चर्या में शामिल होता हैं। साधन विहीन होने पर भी, इनके लक्ष्य सदा ऊंचे ही रहते हैं। ऐसे जातकों की कल्पना शक्ति बहुत तीव्र होती है। इनका भाग्योदय 23, 32, 33 या 35 वें वर्ष में होता है।

तुला लग्न में जन्म लेने वाले जातकों का वर्ण गौर, कद मझोला एवं चेहरा सुन्दर होता है। इनका मुख चौड़ा होता है, नाक बड़ा आकार लिए हुए होती है एवं छाती उन्नत व चौड़ी होती है। ऐसे जातक सदैव प्रसन्नचित्त एवं मुस्कुराते रहते हैं। ये जिसको दिल से एक बार मित्र मान लेते हैं, उसके लिए सर्वस्व न्यौछावर तक कर देते हैं।

ऐसे जातक प्रायः धार्मिक विचारों से ओत प्रोत होते हैं। परिस्थितियों के अनुरूप स्वमं को ढालना इन्हे बखूबी आता है। दूसरे के मन की बात ये आसानी से जान लेते हैं किंतु अपने मन की बात किसी को नहीं देते। ये जातक उचित एवं शीघ्र निर्णय लेने की क्षमता रखते है। छोटी छोटी बातें भी इनके मन मस्तिष्क में हलचल पैदा कर देती हैं।

इनका हृदय विशाल एवं शीघ्र ही द्रवित हो जाने वाला होता है। इनके सुविचारों एवं सुकर्मों को देखते हुए इन्हे सच्चे मायनों में पुण्यात्मा एवं सत्यवादी की संज्ञा देना गलत नहीं होगा। शुक्र गृह के प्रभाव के कारण ये बड़ी आयु में भी युवा स्वरुप दिखते हैं।

 

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